हम रात-भर तैरेंगे
और अगर डूब नहीं गए सवेरे तक
तो कोई न कोई डोंगी छोटी या बड़ी कोई नौका
फिर देगी हमें मौका धरती पर पहुँचकर उथल-पुथल करने का !
हिंदी समय में भवानीप्रसाद मिश्र की रचनाएँ